बहुत होता है...

ध्वस्त शहरों में वजह ढूंढना,
वे समुद्र के किनारे क्यों नहीं बसे,
क्यों बांध दिए गए
बादलों से ढँके पहाड़ के नीचे,
जहाँ सोने को साथ में
एक सूखा जिस्म मयस्सर नहीं
बहुत बुरा है
महीने में एक बार सरहद तक आना
- धीरे से पूछना,
‘बुलाया किसी ने?’
फिर लौट जाना
बूढ़ी टांगों वाले घर में
पलट कर आती हैं आसमान से, गीली आँखें,
उसने तो कहा था
पहली बारिश है यह मौसम की,
यह तो थमी ही नहीं
अरसा हुआ ...

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